सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Contact us

      Contact us

नमस्कार पाठकों!                                                                                                                                                    The Happy Healthy Home Cook पर आने के लिए आपका धन्यवाद। हम अपने ब्लॉग के माध्यम से आपके और आपके परिवार के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सुरक्षित स्वास्थ्य टिप्स, डाइट प्लान और घरेलू नुस्खे शेयर करते हैं।यदि आपके पास हमारे ब्लॉग से जुड़ा कोई सवाल, सुझाव, फीडबैक या बिजनेस इंक्वायरी (Sponsorship/Advertisement) है, तो आप हमसे नीचे दिए गए माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:   

ईमेल (Email): [happyhealthyhomecook@gmail

आप हमसे हमारे [Facebook/Instagram/X] हैंडल पर भी जुड़ सकते हैं।हम कब जवाब देंगे?हम आपके सभी संदेशों को पढ़ते हैं और 24 से 48 घंटों के भीतर जवाब देने का पूरा प्रयास करते हैं।                                                                                                                                 नोट: कृपया किसी भी गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति के लिए सीधे डॉक्टर से संपर्क करें।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, Child mental health in Hindi

बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: माता-पिता के लिए 5 जरूरी टिप्स (Child Mental Health in Hindi)  आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और पढ़ाई के दबाव के बीच, हम अक्सर बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य (Children's mental health) कहीं पीछे छूट जाता है। अगर आपका बच्चा अचानक से चुपचाप रहने लगा है या उसे बहुत जल्दी गुस्सा आ रहा है, तो यह नजरअंदाज करने वाली बात नहीं है। इस लेख में हम जानेंगे कि बच्चों के मानसिक विकास का ख्याल कैसे रखें। बच्चों में मानसिक तनाव के लक्षण कैसे पहचानें? बच्चों के लिए अपनी भावनाओं को शब्दों में बताना मुश्किल होता है। इसलिए माता-पिता को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। व्यवहार में बदलाव: अचानक से बहुत ज्यादा गुस्सा करना या एकदम शांत हो जाना। नींद और भूख में कमी: रात को ठीक से न सोना या खाना कम कर देना। अकेलापन पसंद करना: दोस्तों और परिवार से दूर रहना। स्कूल में प्रदर्शन गिरना: पढ़ाई में मन न लगना। बच्चों में मानसिक तनाव के मुख्य कारण (Root Causes) आज के समय में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने के पीछे कई सामाजिक और पारि...

बच्चों का स्कूल सत्र शुरू: नए सत्र की तैयारी, सेहत और इम्युनिटी के जरूरी टिप्स

बच्चों का स्कूल समय शुरू: नए सत्र की तैयारी और सेहत के जरूरी टिप्स गर्मियों की छुट्टियां खत्म होते ही बच्चों का नया स्कूल सत्र शुरू हो चुका है । बच्चों के मन में जहां मस्ती के दिन खत्म होने की चिंता होती है, वहीं माता-पिता के लिए यह दिनचर्या को वापस पटरी पर लाने का समय होता है। एक नर्स (B.Sc. Nursing) और स्वास्थ्य विशेषज्ञ होने के नाते, मैं समझती हूँ कि स्कूल की शुरुआत केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी है। नया स्कूल सत्र: बच्चों की अच्छी सेहत, सही रूटीन और मजबूत इम्युनिटी के सबसे जरूरी उपाय।  आइए जानते हैं कि इस नए स्कूल सत्र में आप अपने बच्चों की तैयारी को कैसे आसान और सेहतमंद बना सकते हैं। 1. स्कूल बैग और यूनिफॉर्म की रात में ही तैयारी सुबह की जल्दबाजी और हड़बड़ी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि सभी तैयारियां पिछली रात को ही पूरी कर ली जाएं । एक रात पहले बैग सजाएं : टाइम-टेबल के अनुसार किताबें और कॉपियां रात को ही बैग में व्यवस्थित रखें। यूनिफॉर्म और जूते: स्कूल यूनिफॉर्म को अच्छे से प्रेस करके और जूतों को साफ करके एक निश्चित जगह...

वातावरण का बच्चों पर असर: क्या आपका घर बच्चों के लिए सही है?

बच्चों के विकास पर वातावरण का प्रभाव: माता-पिता के लिए एक मार्गदर्शिका एक खुशहाल और तनावमुक्त पारिवारिक परिवेश ही बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास की सही नींव रखता है। एक बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट या कच्ची मिट्टी की तरह होता है। उसे जैसा परिवेश मिलता है, वह वैसा ही आकार लेने लगता है। बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) के अनुसार, बच्चों के व्यक्तित्व को गढ़ने में अनुवांशिकता से भी ज्यादा उनके आसपास के वातावरण की भूमिका होती है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग प्रकार के परिवेश बच्चों को किस तरह प्रभावित करते हैं और माता-पिता इसमें क्या सुधार कर सकते हैं। 1. पारिवारिक वातावरण (Family Environment) घर बच्चे की पहली पाठशाला होती है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक होते हैं। झगड़ों से दूरी: माता-पिता के बीच के आपसी विवाद या घरेलू कलह बच्चों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। इससे उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। खुला संवाद : घर में ऐसा माहौल होना चाहिए जहाँ बच्चे अपने विचार खुलकर बिना किसी डर के साझा कर सकें। भावनात्मक जुड़ाव : माता-पिता का स्नेह और प्रोत्साहन बच्चों के आत्म-सम्मान (Self-estee...